किस किस हद से गुजरे थे ,
किस हद पे तुने छोड़ दिया
पार करनी थी सब हदे ,
तूने सरहद पे ही छोड़ दिया
हसरतो के मोहल्ले में ,
एक घर मैंने भी था लिया
तेरी एक जिद ने मुझे
जिन्दा कबर कर दिया
प्यार के मुआमले में ,
भले ही नया था पिया
आशिक था तेरा पहेले ,
अब जमींदार बना दिया
राहुल शाह
( नवो निशालियो )