Friday, 7 October 2011

अकेला होता है आदमी

          भीड़ में साथ भले हो लाखों
          मोड़ पर अकेला होता है आदमी

         घेर लो खुद को कितने ही रिश्तोंसे
         रुखसत अकेले ही लेता है आदमी

         चाहतों की बुलंदिया छुलो मगर
         यादों के सन्नाटे में अकेला होता है आदमी

         भर लो हर साँस में उसकी खुशबु को
         धुंध के धुए में अकेला होता है आदमी

         फ़रिश्ते भी जब लेने आएंगे तुम्हे
         छोड़ेंगे वंहा जंहा अकेला होता है आदमी

         खुदी से कर,  कर गहेरी दोस्ती इतनी
         अकेला न रहे.  जंहा अकेला होता है आदमी


           રાહુલ શાહ
      ( નવો નિશાળીયો )

  http://navonishaliyo.blogspot.com

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